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मेरा गांव मेरी शान: बरोदा गांव में स्वास्थ्य सेवाओं में चिकित्सकों का प्रभाव, दवाइयों का अभाव

बरोदा गांव में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मिली-जुली तस्वीर सामने आ रही है। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और आयुष्मान आरोग्य मंदिर दोनों चल रहे हैं, जहां डॉक्टर अपनी ड्यूटी ठीक से निभा रहे हैं और मरीजों को बेहतर सेवा देने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों से बात करने पर सामने आया कि यहां तीन चिकित्सक तैनात हैं, जो एलोपैथी, आयुर्वेदिक और दंत चिकित्सा की सेवाएं दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि डॉक्टरों के व्यवहार और इलाज से उन्हें कोई खास शिकायत नहीं है, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी दवाइयों की कमी को लेकर है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार दवाइयों का स्टॉक समय पर नहीं पहुंचता, जिसके चलते मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है। कुछ मामलों में तो लोगों को जरूरी दवाइयों के लिए दो-दो हफ्ते तक इंतजार करना पड़ता है या फिर बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। इसके अलावा पीएचसी के भवन को लेकर भी गांव में विवाद चल रहा है। मौजूदा पीएचसी का भवन काफी पुराना और छोटा हो चुका है, जिससे मरीजों और स्टाफ को दिक्कत होती है। नए भवन के निर्माण के आदेश होने के बाद गांव के एक पक्ष ने इसे गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर बनाने का प्रस्ताव दिया और वहां निर्माण कार्य शुरू भी करवा दिया। इस पर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताते हुए निर्माण रुकवा दिया। उनका कहना है कि पीएचसी के लिए पहले से ही करीब 1 एकड़ से ज्यादा जमीन स्वास्थ्य विभाग के नाम है, जो वर्तमान स्थान पर मौजूद है और यह जगह गांव के बीच में होने के कारण ज्यादा लोगों की पहुंच में है। मामला बढ़ने पर अब यह विवाद न्यायालय तक पहुंच गया है। अदालत ने फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। कुल मिलाकर बरोदा में डॉक्टरों की सेवाएं संतोषजनक हैं, लेकिन दवाइयों की कमी और पीएचसी भवन को लेकर चल रहा विवाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर डाल रहा है।

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