सहकारिता, कारागार, निर्वाचन, विरासत व पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में एक राष्ट्र-एक चुनाव को जनांदोलन बनाया है। हमें उनके संकल्प को पूरा करने के लिए देश पर बार-बार चुनाव से आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक स्तर के बोझ को कम करने में अपनी भागीदारी करनी होगी। उन्होंने अपनी सहमति के साथ सदन में मौजूद प्राध्यापकों व छात्राओं से आह्वान किया तो उन्होंने भी हाथ खड़े करके पुरजोर समर्थन किया। डाॅ. अरविंद शर्मा गोहाना के राजकीय महिला महाविद्यालय के 44वें वार्षिकोत्सव व पुरस्कार वितरण समारोह में अपनी पत्नी डॉ. रीटा शर्मा के साथ मुख्यातिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। प्राचार्य डॉ. शमशेर हुड्डा ने डॉ. अरविंद शर्मा का पगड़ी बांधकर स्वागत किया। प्रतिभाशाली छात्राओं से सीधा संवाद करते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साढ़े 10 साल की अवधि में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रही हैं। उन्होंने प्रतिभाशाली छात्राओं को उनकी उपलब्धियों पर पुरस्कृत किया। इसके बाद महाविद्यालय प्रशासन की ओर से डिजिटल पुस्तकालय निर्माण की मांग को मंजूर करते हुए 25 लाख रुपये की राशि अपने स्वैच्छिक कोष से देने की घोषणा की। साथ ही डॉ. अरविंद शर्मा ने दो वाटर कूलर देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व की प्रदेश सरकार में बिना पर्ची-बिना खर्ची, केवल योग्यता आधार पर युवाओं को बेहतर अवसर मिले हैं। एक राष्ट्र-एक चुनाव विचार को मिला बड़ा समर्थन डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि देश को दुनिया के मंच पर आगे लाने के लिए प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से एक राष्ट्र-एक चुनाव को लागू करवाने का संकल्प लिया था। लोकसभा की संयुक्त संसदीय समिति ने एक राष्ट्र-एक चुनाव के विचार पर राजनीतिक दलों व आमजन के सुझाव प्राप्त किए हैं। इसमें भी एक राष्ट्र-एक चुनाव के विचार को बड़ा समर्थन मिला। हर साल देश में कहीं न कहीं चुनाव होने से विकास का पहिया चुनावी प्रक्रिया के कारण रुक जाता है। देश में मुहिम चल रही है, जिसमें सामाजिक, धार्मिक संस्थाएं, स्थानीय निकाय, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक राष्ट्र-एक चुनाव के समर्थन में अपने प्रस्ताव भेज रहे हैं। अमेरिका, जर्मनी, इजराइल जैसे विकसित देश पहले से ही इस प्रक्रिया को अपना रहे हैं।