लोहड़ी का पर्व मंगलवार को जिले में बडी धूमधाम से मनाया गया। शाम ढलते ही मोहल्लों, कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने लकड़ियां इकट्ठा कर अग्नि प्रज्ज्वलित की। आग के चारों ओर परिवार, बच्चे और युवा एकत्र हुए और ढोल की थाप पर नाचते-गाते हुए लोहड़ी का आनंद लिया। महिलाओं ने बाबा कर्णपुरी डेरा में सुंदरिये-मुंदरिये होए, तेरा कौन बेचारा होए, दुल्ला भट्टी वाला होए, दुल्ले की धी ब्याही होए, कोठे उते हुक्का, ऐ घर भूखा आदि पंजाबी लोक गीतों, बैंड-बाजों की धून के साथ, गिद्दा और भांगड़ा की थाप पर भक्तजन झूमते-नाचते दिखाई दिए। बच्चों में रेवड़ी, मूंगफली, गजक और पॉपकॉर्न बांटने को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। लोहड़ी को फसल और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। खासकर नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं वाले परिवारों में यह पर्व विशेष रूप से मनाया गया। लोगों ने अग्नि में तिल, गुड़ और मूंगफली अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।