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रोहतक: दोनों संगठनों के बीच मतभेद की स्थिति बनी विवाद की वजह : अधिवक्ता रणधीर सिंह

जाट सेवा संघ ट्रस्ट के संविधान से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें पारदर्शिता से प्रस्तुत नहीं करने व अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति को समानांतर संगठन के रूप से सक्रिय रखने से दोनों संगठनों के बीच मतभेद की स्थिति पैदा हुई। अब यह विवाद का कारण बनी हुई है। यह कहना है जन सेवा संघ के चेयरमैन अधिवक्ता रणधीर सिंह का। वह शनिवार को मैना पर्यटन केंद्र में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। चेयरमैन ने कहा कि 26 जून 2022 को संघ की कार्यकारिणी गठन के बाद कमेटी को पूर्व दस्तावेज विधिवत रूप से प्राप्त नहीं हुए। पिछले दो वर्षों में कड़ी मेहनत से धाम की गतिविधियां पुनर्जीवित की। इसके बाद 22 फरवरी 2025 को बैठक कर आरक्षण संघर्ष समिति के नाम पर गतिविधियां प्रारंभ की गईं। इससे संगठन में तालमेल प्रभावित हुआ। धाम से आंदोलन के लिए आर्थिक सहयोग की मांग पर प्रबंधन ने इसे अस्वीकार कर दिया। यहीं से संगठन में मतभेद बढ़ा। आयकर विभाग के नोटिस से ट्रस्ट डीड की कमी उजागर हुई। पंजीकरण के समय इररिवोकेबल क्लॉज जाट सेवा संघ के संविधान में शामिल नहीं की गई। साजिश के तहत ट्रस्ट को दिल्ली में 11 मई 2017 को रजिस्टर्ड कराया। ट्रस्ट डीड की कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

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