कोसली। कोसली गांव स्थित खेल स्टेडियम में कोचों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। स्टेडियम बने करीब 15 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक यहां विभिन्न खेलों के प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। कई बार मांग उठाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2010 में करीब पांच एकड़ भूमि पर स्टेडियम का निर्माण इस उम्मीद के साथ कराया गया था कि गांव के बच्चों को शहरों जैसी खेल सुविधाएं मिलेंगी और वे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे। लेकिन कोचों की कमी और आधुनिक संसाधनों के अभाव में खिलाड़ियों को निराशा हाथ लग रही है। स्टेडियम में एथलेटिक्स, कुश्ती और कबड्डी के कोच होने चाहिए। इसके अलावा यहां न तो इंडोर जिम है और न ही इंडोर हॉल की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। महिला बॉक्सिंग कोच की मेहनत से मिल रही सफलता स्टेडियम में कार्यरत महिला बॉक्सिंग कोच के प्रयासों से कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। यदि अन्य खेलों के लिए भी कोच उपलब्ध कराए जाएं तो क्षेत्र की प्रतिभाएं और बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। खिलाड़ियों ने खुद तैयार किया मैदान क्रिकेट खिलाड़ियों ने बताया कि स्टेडियम की अनदेखी के कारण उन्होंने स्वयं झाड़ियां साफ कर अपने खर्च पर मैदान में घास लगवाई। इसके लिए खिलाड़ियों ने चंदा एकत्र कर रखरखाव के लिए एक व्यक्ति भी नियुक्त किया हुआ है। खिलाड़ियों ने उठाई मांग खिलाड़ी अजय कुमार ने कहा कि स्टेडियम केवल नाम का रह गया है और यहां ऐसी कोई सुविधा नहीं है जिससे खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में स्वयं के प्रयासों से अभ्यास कर रहे: पहलवान राजबीर ने बताया कि वह स्वयं के प्रयासों से अभ्यास कर रहे हैं। स्टेडियम बनने के बाद से आज तक यहां कुश्ती कोच की नियुक्ति नहीं हुई। अमन ने बताया कि स्टेडियम में कोई भी सुविधा नहीं है। लंबे समय से यहां पर कोच की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में खिलाड़ी को काफी परेशानी होती है। मांग है कि यहां पर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए।