महाभारतकालीन अहर गांव शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा बेहतर न होने पर लगातार पिछड़ रहा है। गांव के सीनियर सेकेंडरी स्कूल को एक समय मेरिट मशीन कहा जाता था। स्कूल आज दाखिलों के लिए तरस रहा है। अभिभावक पर्याप्त सुविधा न मिलने पर प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को भेजना पसंद कर रहे हैं। यही स्थित स्वास्थ्य सेवाओं की है। अहर समेत आसपास के 52 गांवों को जोड़ने वाली सीएचसी को अपना भवन नहीं मिल पाया है। ऐसे में ग्रामीणों को सीएचसी में मरहम पट्टी तक मुश्किल हो पाता है। ग्रामीण पेट में दर्द या बुखार होने पर सीएचसी की बजाय सीधे गांव के क्लीनिक पर जाते हैं। यानी ग्रामीणों केा सीएचसी से अधिक क्लीनिक के इलाज पर भरोसा है। इसी के नतीजन गांव में क्लीनिक की संख्या भी बढ़ रही है। अहर गांव जिला मुख्यालय से करीब 31 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर व्यवस्था होना स्थानीय लोगों की मांग है। प्रशासन और संबंधित विभाग के दावे केवल हवाई साबित हो रहे हैं। गांव सीएचसी का भवन कंडम होने के बाद हटा दी है। अब अस्थायी केंद्र बनाया गया है। यह एक तरह से गर्भवतियों का रेफरल केंद्र बन गया है।