कनीना स्थित बाबा मोलड़ नाथ मंदिर में एक सप्ताह तक चलने वाली श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को कथा वाचक ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा में जरासंध वध की कथा व भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव की कथा सुनाई गई। कथा व्यास दाशानू दास आचार्य प्रवेश शर्मा ने भगवान की बाल लीलाओं के प्रसंगों का वर्णन किया। इससे पहले कथा की शुरुआत कथावाचक ने श्रद्धालुओं के साथ भागवत पूजन के साथ की। कथावाचक ने कहा कि हर मनुष्य को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। जब अत्याचारी कंस के पापों का बोझ बढ़ गया, तब भगवान श्रीकृष्ण को अवतरित होना पड़ा। जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है तब तब भगवान अवतरित होते हैं। कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजन प्रस्तुत किया, इस पर श्रद्धालुओं ने खूब नृत्य किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और वह गोकुल धाम पहुंचे।