बवानियां गांव की माया देवी महज 26 वर्ष की थीं, जब उनके पति जिले सिंह श्रीलंका में चलाए गए ऑपरेशन पवन के दौरान साल 1988 में शहीद हो गए थे। जिले सिंह चाहते थे कि उनके बेटे भी सैनिक बनकर देश की सेवा करें। माया देवी ने खेती और सेना से मिलने वाली पेंशन से न सिर्फ तीन बच्चों की परवरिश की, बल्कि अपने दो छोटे बेटों को फौजी बनाकर पति की अंतिम इच्छा भी पूरी की। वीरांगना माया देवी बताती हैं कि पति के बलिदान के वक्त बड़ा बेटा संजय महज 7 वर्ष का था। दूसरे नंबर का बेटा राजीव साढ़े तीन साल और सबसे छोटा बेटा विजय महज 9 माह का था। जिले सिंह का सेना के प्रति गहरा लगाव था। वे जब भी घर आते तो बेटों में सैनिक की छवि देखते थे। वे तीनों बेटों को सेना में भेजना चाहते थे। पति का बलिदान होते ही तीन बेटों और परिवार की जिम्मेदारी माया देवी पर आ गई। माया देवी ने ढाई एकड़ भूमि पर खेती और पशुपालन कर बच्चों को पाला। आय के सीमित साधन होने के बावजूद बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई। माया देवी ने बताया उन्होंने बड़े बेटे संजय को घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार किया। संजय के साथ मिलकर दोनों छोटे बेटों राजीव और विजय को सेना में भर्ती कराया। साल 2014 में मकान बनाते समय गिरने के कारण बड़े बेटे संजय का निधन हो गया।