सरसों की फसल पक चुकी है और होली के बाद इसकी कटाई शुरू कर दी जाएगी। कटाई के दौरान फसल पर चिपका रहने वाला सूक्ष्म कीट चेपा उड़ने लगेगा। कटाई के दौरान ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कुछ दिनों तक इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। इस दौरान चिकित्सकों ने आमजन को अपनी आंखों का विशेष ध्यान देने की अपील की है। क्या है चेपा: एक छोटा, कोमल शरीर वाला रस चूसने वाला कीट है, जो मुख्य रूप से सरसों की फसलों को नुकसान पहुंचाता है। ये हल्के हरे, पीले या काले रंग के होते हैं, जो झुंड में पौधे के कोमल हिस्सों जैसे फूलों, कलियों और फलियों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देते हैं। चेपा को अंग्रेजी में एफिड्स भी बोला जाता है। कृषि विभाग के उपनिदेशक देवेंद्र सिंह ने बताया कि चेपा बहुत छोटे होते हैं और अक्सर पत्तियों के नीचे या नए अंकुर पर पाए जाते हैं। इन कीटों के रस चूसने से पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती हैं और मुड़ जाती हैं। यह कीट पौधे पर एक चिपचिपा पदार्थ (मधुरस) छोड़ता है, जिस पर काली फफूंद उग आती है, जो प्रकाश संश्लेषण को रोकता है। ठंड के मौसम और बादल छाए रहने पर इनका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि फसल की कटाई के दौरान किसान अपनी आंखों पर चश्मा लगाकर रखें। इसके बाद भी चेपा आंखों में घुस जाए तो आंखों को बगैर मसले साफ पानी से धोएं। उन्होंने बताया यह कीट अक्सर आंखों में जाते ही अपना लार्वा छोड़ देता है, जिससे आंखों में जलन तो होती ही है साथ ही आंखें सुर्ख लाल हो जाती हैं। चिकित्सक ने आमजन से अपील करते हुए कहा है कि सड़क पर बाइक आदि चलाते समय हेल्मेट का या चश्मा अवश्य लगाएं।