कनीना। सावन मास के पहले सोमवार को उपमंडल के ऐतिहासिक एवं पौराणिक बाघेश्वर धाम, बाघोत में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर परिसर में पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, चंदन, पुष्प, नारियल, फल, पेठा, केला और दूध अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना की। पहले सावन सोमवार पर 50 कांवड़ियों ने पवित्र कांवड़ चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। बाघेश्वर धाम के महंत रोशन पुरी महाराज ने बताया कि 11 अगस्त को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक शिवरात्रि मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस अवसर पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के पहुंचने की संभावना है। उन्होंने बताया कि हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात सहित देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल, जर्मनी और पाकिस्तान से भी श्रद्धालु वर्षों से यहां आकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में व्यापक प्रबंध किए गए हैं। दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई है। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वहीं मंदिर समिति द्वारा हर दो-तीन मीटर की दूरी पर स्वयंसेवकों और समिति सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। महंत रोशन पुरी ने बताया कि कांवड़ियों के विश्राम, पेयजल, चिकित्सा, भंडारे एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी विशेष व्यवस्था की गई है। पूरे सावन मास में श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क लंगर संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बाघेश्वर धाम लगभग 1684 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग, प्राचीन कदंब वृक्ष और ऐतिहासिक सरोवर इस स्थल की पौराणिक महत्ता को दर्शाते हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के पूर्वजों ने यहां तपस्या की थी तथा राजा दिलीप को भगवान शिव ने बाघ के रूप में दर्शन दिए थे। इसी कारण यह स्थान बाघेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी द्वारा कराया गया था। श्रद्धालुओं का कहना है कि बाघेश्वर धाम में जलाभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन के पहले सोमवार पर पूरे मंदिर परिसर में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से वातावरण शिवमय बना रहा।