कड़ाके की ठंड ने पक्का मोर्चा लगाए बैठे पीजीआई रोहतक के अनुबंधित कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धरने के पांचवें दिन भी सरकार व प्रशासन द्वारा मांगों पर कोई सुध नहीं लेने पर कर्मचारियों ने ठंड से बचने के लिए धरनास्थल को खुले आसमान से तंबू में बदल दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार ठंड में खुले में बैठने से करीब 35 कर्मचारियों का स्वास्थ्य बिगड़ गया है। इनमें से कई को तेज बुखार, जुकाम, खांसी और सर्दी जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ कर्मचारियों को तो इलाज के लेने के लिए अपने घर को रवाना होना पड़ा। कुछ कर्मचारी धरनास्थल पर दवाइयां लेकर लड़ाई जारी रखे हुए हैं तो ठंड से बचने के लिए रात भर चाय, गर्म पानी व अन्य पेय पदार्थ ले रहे हैं। धरने पर मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि रात के समय तापमान काफी नीचे गिर जाता है, जिससे ठंड असहनीय हो जाती है। पहले खुले में बैठे थे, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने पर मजबूरी में पूरे घटनास्थल को तिरपाल से कवर करके तंबू में बदल दिया है। पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारी लंबे समय से कौशल रोजगार में शामिल करने की मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। बीमार हुए कर्मचारियों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। इसके बावजूद भी अभी तक 10 के करीब महिला मोर्चे पर डटी हुई हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रशासन व सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही और अनसुना कर रही है। बातचीत में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि ठंड ने उनकी हिम्मत को चुनौती दी हुई है। उन्होंने कहा की वह दो दिन और प्रशासन की ओर दिए गई समय का इंतजार करेंगे। धरने के सात दिन पूरे होने पर आठवें दिन वे सभी कर्मचारियों व किसान यूनियन व खाप पंचायतों को यहां बुलाकर बड़ी पंचायत करेंगे और आगे की रणनीति बनाते हुए बढ़ा फैसला लेंगे। बॉक्स धरना स्थल पर चोरों की नजर, पुलिस ने हटाई पीसीआर धरना स्थल पर चोर भी अपनी नजरें जमाएं बैठे हैं। जैसे ही कर्मचारियों की आंखे लगती है। चोर इसका फायदा उठाते हुए वहां से चोरी कर लेते हैं। कर्मचारियों ने बताया कि उनका अब तक यहां से रात के समय में काफी सामान चोरी हो चुका है। चोरों ने खाना पकाने के लिए लाए गए बर्तनों तक पर अपना हाथ साफ कर लिया है। पुलिस ने भी धरना स्थल पर किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए दो दिन तक एक डायल 112 की गाड़ी लगाई थी, लेकिन दो दिन बाद उसे भी हटा लिया गया है। अब ऐसे में कर्मचारी रात को चोरों पर नजर रखने के लिए बारी-बारी पहरा दे रहे हैं। बाहर ट्राली व अपनी कारों में बैठकर भी चारों और नजर रखते हैं।