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कुरुक्षेत्र: धर्मनगरी को मिली नई पहचान, शिल्प और लोक कला संरक्षण का बनी केंद्र

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा 5162 साल पहले पूरी मानवता के लिए दिए गीता के अमर संदेश से जहां धर्मनगरी की पहचान देश-दुनिया में बनी है वहीं गीता जयंती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव ने भी नई पहचान दी है। अब धर्मनगरी देश की शिल्प व लोक कला संरक्षण का केंद्र बन चुकी है। महोत्सव के चलते पवित्र ब्रह्मसरोवर पर पूरे देश की लोक संस्कृति एवं शिल्प कला के रंग बिखरे हुए हैं, जिसके चलते लघु भारत का नजारा दिखाई दे रहा है। महोत्सव में देश के 21 राज्यों से आए कलाकार अपनी हस्तकला के माध्यम से अपनी कला का हुनर दिखा रहे हैं। उनकी यह कला हर रोज पहुंच रहे हजारों पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पर्यटकों को ब्रह्मसरोवर के घाटों पर छह दिनों से उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, असम, त्रिपुरा, लद्दाख, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जा रही है। वीरवार को भी कलाकारों ने न केवल अपने-अपने राज्य की लोक कलाएं प्रस्तुत की बल्कि पर्यटकों को गदगद कर दिया।

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