हुनर कभी कैद नहीं होता, बस उसे सही दिशा चाहिए होती है.... इस लाइन को यथार्थ कर रही है अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते सरस मेले में लगी जेल विभाग की स्टॉल। इस बार सबसे ज्यादा भीड़ इसी स्टॉल के इर्द-गिर्द दिख रही है, यहां न तो कोई फिल्मी सितारा है और न ही महंगा ब्रांडेड सामान। यह भीड़ खींच रहा है प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के हाथों का बेमिसाल हुनर। लकड़ी की चमकदार कुर्सियां, आरामदायक सोफा सेट, सुंदर पेन स्टैंड, हाथ से काते चरखे और कपड़े के रंग-बिरंगे उत्पाद ये सब देखकर कोई यकीन नहीं कर पाता कि इन्हें बनाने वाले हाथ कभी अपराध की दुनिया में डूबे थे। ब्रह्मसरोवर के तट पर लगा यह स्टॉल अब मेले का आकर्षण केंद्र बन चुका है। लोग यहां सिर्फ सामान खरीदने नहीं, बल्कि उन हाथों की कहानी सुनने और प्रेरणा लेने आ रहे हैं जो कभी गुनाह करते थे, आज वही हाथ समाज को कुछ दे रहे हैं। हरियाणा जेल विभाग के अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि पिछले गीता जयंती महोत्सव में कैदियों के बनाए उत्पादों का कारोबार एक करोड़ रुपये से ज्यादा रहा था। इस बार हम उससे कहीं अधिक की उम्मीद कर रहे हैं। लोग बार-बार आ रहे हैं, दोस्तों-रिश्तेदारों को बता रहे हैं। कई लोग तो पहले से फोन करके पूछ रहे हैं कि स्टॉल कब तक रहेगी। वह लोग स्टाल से विवाह शादियों में दहेज देने के लिए भी यहां से फर्नीचर का सामान खरीद रहे हैं।