पिहोवा के रहने वाले सुशील कुमार के शव को करीब दो माह 20 दिन बाद आखिरकार अपनी मिट्टी नसीब हो गई। पिछले वर्ष जनवरी माह में फ्रांस गए सुशील की संदिग्ध मौत हो गई थी, जिसकी परिजनों को गत 16 फरवरी को सूचना मिली थी। अब शव घर पहुंचा तो परिवार बिलख उठा। सुशील कुमार के पिता रोडवेज विभाग से चतुर्थ श्रेणी कर्मी के तौर पर सेवानिवृत हुए थे और वे बेहद मुश्किल से अपने परिवार का गुजारा चला रहे थे। ऐसे में सुशील कुमार ने विदेश जाकर काम करने का फैसला लिया ताकि वह परिवार का सहारा बन सके। लाखों रुपये खर्च कर एक साल पहले ही वह फ्रांस गया था और वहां मजदूरी करने लगा था। लेकिन परिवार के पास अचानक उसकी मौत की सूचना आई थी, जिसके बाद उसके शव को यहां लाए जाने के प्रयास किए जा रहे थे।