जहां एक ओर आधुनिकता के कारण गौरैया का अस्तित्व संकट में है, वहीं श्याम नगर, करनाल में स्थित ‘गौरैया एन्क्लेव’ में दो हजार से अधिक गौरैया चिड़ियों को नया आशियाना मिला है। यहां दिनभर गौरैयाओं की चीं-चीं की मधुर आवाज सुनाई देती है, जो एक सुखद अनुभूति कराती है। सत्या फाउंडेशन नामक पक्षी प्रेमी संस्था के सदस्यों के अथक प्रयासों से यह संभव हो पाया है। संस्था ने इस क्षेत्र में हजारों घोंसले बनवाए, जिसमें गौरैया ने अपना घर बसा लिया। प्रशासनिक अधिकारी भी इस अद्भुत पहल को देखने आते हैं। वसंत के मौसम में एडीसी यश जलूका ने इस स्थान का दौरा किया था और पतंगबाजी कर रहे बच्चों को चीनी डोर का उपयोग न करने की सलाह दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने स्थानीय लोगों की समस्याओं को भी सुना और उनके समाधान के लिए उचित कदम उठाए। गौरैया के बढ़ते संरक्षण को लेकर समाज का नजरिया बदला है, लोग अब इनके संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी भी संस्था के इस प्रयास की सराहना कर चुकी हैं।