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करनाल में श्रीमद् भागवत कथा, स्वामी शाश्वत आचार्य ने कहा- प्रभु का अवतार अत्याचार मिटाने और धर्म स्थापना के लिए

सेक्टर 14 स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान गोदा विहार मंदिर, वृंदावन के पीठाधीश्वर महंत स्वामी शाश्वत आचार्य ने प्रवचन में कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब-तब प्रभु अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। स्वामी शाश्वत आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मथुरा के राजा कंस के अत्याचार चरम पर पहुंचे, तब धरती की पुकार सुनकर श्री हरि विष्णु ने देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने गोपियों के घर से माखन चुराकर यह संदेश दिया कि सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है। हमें नश्वर सांसारिक भोगों में समय बर्बाद करने के बजाय परमात्मा की प्राप्ति का लक्ष्य रखना चाहिए, क्योंकि यही जीवन का कल्याणकारी मार्ग है। इसी तरह, त्रेता युग में लंकापति रावण के अत्याचारों से धरती डोलने लगी थी, तब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने अवतार लिया। स्वामी शाश्वत ने चिंता जताते हुए कहा कि आज भारत का युवा विदेशी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहा है, जो हमारी संस्कृति और धरोहर के लिए खतरा है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और विदेशी प्रभाव से बाहर निकलने का आह्वान किया।

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