करनाल में पीपल वाले मंदिर जाउंला गेट में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन कथा व्यास हरिओम महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि अपने इष्ट देवता व देवी देवताओं की निंदा कदापि, नहीं सुनी चाहिए, इससे बड़ा दोष लगता है। हरिओम महाराज ने श्री राम जी की बाल लीला का बखान किया। उन्होंने बताया किमंथरा ने कैकेयी को कहा कि महाराज से एक वरदान में भरत को अयोध्या का राज और दूसरे वरदान में राम को वनवास मांग लो. इसके बाद कैकेयी महाराज दशरथ के पास वरदान मांगने पहुंच गई और वरदान में श्रीराम के लिए वन मांग लिया. इस कारण ना चाहते हुए भी राजा दशरथ को राम को वन भेजना पड़ा हरिओम महाराज ने श्री राम और केवट के संवाद का जो उनके बीच वनवास के दौरान हुआ. वनवास पर जाने के बाद प्रभु श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी को गंगा नदी पार करनी थी. उस समय उनकी मुलाकात केवट से हुई. नदी को पार करने के लिए उन्हें केवल की शर्त माननी पड़ी, शर्त के पूरा होने पर केवट प्रभु श्री राम को नदी पार करवाई.