न्यू रमेश नगर की सोसायटी की ओर से 12 साल के बाद एक बार फिर से न्यू रमेश नगर की पार्क में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा में कथा व्यास ब्रह्मचारी भोलानंद महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि हमें हमेशा अपने गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा रखनी चाहिए, क्योंकि भगवान को मनाना आसान है, गुरु को मनाना बड़ा मुश्किल है। वहीं आज वक्त बदल गया है शिष्य गुरु से ज्ञान लेने के बाद गायब हो जाते है जो गलत है। गुरु ही केवल भगवान से मिलने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि साधना के लिए गुरु का होना बहुत जुरुरी है। गुरु के हाथ में अपनी नाव सौप दो अपने आप भव सागर से पार हो जाओगे। उन्होंने मेरी झोली में श्यामा, प्रभु भक्ति भरना कभी गिरने लगू जो मेरी बांह पकड़ना मेरी झोली में श्यामा प्रभु भक्ति भरना भजन गाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। ब्रह्मचारी ने ध्रुव चरित्र का मंचन करते हुए बताया कि अवधपुरी शहर में संभुमन राज किया करते थे, जिनका पुत्र था उत्तानपाद, उनकी रानी का नाम था सुनीति। राजा की कोई संतान नहीं थी। एक दिन भ्रमण करते हुए नारद जी रानी सुनीति के पास आकर उसकी चिंता का कारण पूछा, तो रानी ने नारद को सारी बात बताई। तो नारद जी रानी को राजा की दूसरी शादी करवाने की सलाह देते हैं और ये सुनकर रानी अपने पिता के घर पहुंच जाती है और अपनी मां से अपनी छोटी बहन सुरुचि का अपने पति के लिए हाथ मांगती है, लेकिन उसकी मां मना कर देती है लेकिन बाद में रानी अपने माता-पिता को मनाकर अपनी छोटी बहन सुरुचि के साथ अपने पति का विवाह करवा देती है। सुरुचि रानी राजा से चार वर मांग लेती है। समय बीतने पर दोनों रानियों के पुत्र पैदा होते हैं। ध्रुव के पांच साल के होने पर रानी सुरुचि उसे अपमानित कर घर से निकाल देती है। ध्रुव जंगल में तपस्या करके ज्ञान को प्राप्त कर अमरत्व को प्राप्त करता है और पूरी दुनिया में अलग पहचान बनाता है। वह ध्रुव तारे की तरह चमकता है। कथा में सभी श्रद्धालुओं ने आरती की।