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VIDEO : कैथल में माता गेट स्थित डेरा सूर्यकुंड में विश्व प्रसिद्ध मेले की शुरूआत

कैथल के माता गेट स्थित डेरा सुर्यकूंड में शनिवार को दो दिवसीय विश्व प्रसिद्ध मेले की शुरूआत हुई। बता दें कि यह मेला चैत्र नवरात्र पर अमावस्या पर लगता है। इसके बाद पहले नवरात्र पर शाम के समय इस मेले का समापन होगा होगा। डेरे में काली माता मंदिर बाजीगर समाज की कुलदेवी का मंदिर है। मेले को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। डेरे के महंत रमन पुरी महाराज ने बताया कि करीब 150 वर्ष पहले सूर्यकुंड डेरे में पंजाब निवासी बाजीगर समाज का एक बुजुर्ग व्यक्ति यहां पर विश्राम करने के लिए ठहरा। उसने पूरी रात यहां पर बिताई। यहां पर काली माता ने बुजुर्ग को सुबह के समय दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि आज के बाद से हर वर्ष चैत्र नवरात्र पर्व के पहले दिन बाजीगर समाज के लोगों की पूजा-अर्चना करने पर वे उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगी। तभी से यह मंदिर बाजीगर समाज के लोगों के लिए कुल देवी का मंदिर बन गया। बाजीगर समाज में विवाह होने के बाद सबसे पहले नवविवाहित जोड़ा इस मंदिर में माथा टेकता है और उसके बाद ही गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है। डेर का इतिहास महाभारत काली से जुड़ा महंत ने बताया कि इस डेरे का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। यह कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि का तीर्थ है। प्राचीन मान्यता के अनुसार महाभारत काल में ज्येष्ठ पांडव पुत्र युुधिष्ठिर ने कैथल में ही नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी। इनमें से सबसे बड़ा कुंड सूर्यकुंड के नाम से स्थापित किया गया था। मंदिर को बाजीगर समाज की कुलदेवी माना जाता है। इसलिए यहां बाजीगर समाज के लोग ज्यादा संख्या में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं।

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