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जींद: अमर उजाला फाउंडेशन का संवाद: महिला किसानों को सुरक्षित स्प्रे तकनीक की दी जानकारी

जींद। खेती में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान में सुरक्षित स्प्रे तकनीक एवं कीटनाशकों के सही इस्तेमाल विषय पर संवाद एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न गांवों से आईं करीब 100 महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने किसानों को कीटनाशकों के संतुलित उपयोग, व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों तथा पर्यावरण संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला किसानों को खेती में प्रयोग होने वाले कीटनाशकों के सुरक्षित और वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करना था, ताकि फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और मिट्टी की गुणवत्ता को भी सुरक्षित रखा जा सके। विशेषज्ञों ने कहा कि आवश्यकता से अधिक रसायनों का प्रयोग न केवल फसलों की लागत बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जल स्रोतों और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए कीटनाशकों का प्रयोग केवल वैज्ञानिक सलाह और आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम के फैसिलिटेटर डॉ. वजीर चौहान ने किसानों को सुरक्षित स्प्रे तकनीक, सही मात्रा में कीटनाशक के उपयोग, मौसम के अनुसार छिड़काव, स्प्रे के दौरान मास्क, दस्ताने, चश्मा और अन्य सुरक्षा उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर किसान जहरीले रसायनों के दुष्प्रभाव से स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि कीटनाशकों के छिड़काव के बाद खाली डिब्बों का सुरक्षित निस्तारण, निर्धारित अंतराल के बाद ही खेत में प्रवेश, तथा अनुशंसित मात्रा का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। किसानों ने भी विशेषज्ञों से फसलों में कीट नियंत्रण, रसायनों के सुरक्षित भंडारण और वैकल्पिक उपायों से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विस्तार से समाधान किया गया। अमर उजाला फाउंडेशन की इस पहल की प्रतिभागियों ने सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए, ताकि किसानों, विशेषकर महिला किसानों को आधुनिक और सुरक्षित कृषि तकनीकों की सही जानकारी मिल सके तथा वे कम लागत में बेहतर और सुरक्षित उत्पादन कर सकें। आज खेती में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें वैज्ञानिक खेती और सुरक्षित कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने महिला किसानों को केवल खेती तक सीमित न रहकर कृषि-उद्यमी बनने और आधुनिक व टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित खेती ही भविष्य की समृद्ध खेती है। --डॉ. सुरेंद्र यादव निदेशक हमेटी जींद।

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