कस्बे के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास स्थित करीब 100 एकड़ कृषि भूमि पर इन दिनों सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि जब वाटर ट्रीटमेंट विभाग के पास गंदे पानी को छोड़ने के लिए कोई स्थान नहीं होता था, तब उस पानी को जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से उनके खेतों में डाला जाता था। इससे सिंचाई भी हो जाती थी और विभाग को भी सुविधा रहती थी लेकिन किसानों के मुताबिक अब परिस्थितियां बदल गई हैं। गेहूं की बिजाई के बाद खेतों को पानी की आवश्यकता है, वहीं जनस्वास्थ्य विभाग खेतों में पानी छोड़ने के बजाय उसे गतौली ड्रेन में डाल रहा है। इससे किसानों के सामने सिंचाई का संकट गहरा गया है। समस्या को लेकर किसान नपा चेयरमैन डॉ. संजय जांगड़ा के पास पहुंचे और अपनी पीड़ा साझा की। मौके की गंभीरता को देखते हुए चेयरमैन तुरंत संबंधित स्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर समाधान की मांग की। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा और सिंचाई के लिए आवश्यक पानी खेतों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। किसानों का कहना है कि यदि समय पर सिंचाई नहीं हुई तो उनकी गेहूं की फसल गंभीर नुकसान झेल सकती है।