फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जींद: फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

शाहिल शर्मा Updated Tue, 17 Feb 2026 06:15 PM IST

पांडु-पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर मंगलवार को फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया तथा पिंडदान करके तर्पण किया। पिंडारा तीर्थ पर सोमवार शाम से ही श्रद्धालु आना शुरू हो गए थे। मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान करने के बाद पिंडदान शुरू कर दिया था, जो मध्याह्न के बाद तक चलता रहा। इस दौरान दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया तथा सूर्य देव को जल अर्पण करके सुख समृद्धि की कामना की। वहीं पिंडारा तीर्थ पर अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थी, जिस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीदारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पिंड तारक तीर्थ के संबंध में किवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंड तारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि फाल्गुन मास की अमावस्या को शिव खप्पर पूजा करने का विधान है। यह पूजा दुखों को नष्टकर सुखमय जीवन जीने की एक आध्यात्मिक पद्धति है। इस दिन पूरे विधि विधान से पूजा पाठ अने से भगवान शिव और माता पार्वती सन्न होते हैं।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें