होली भारत में हिंदुओं का बहुत बड़ा पर्व है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन के अगले दिन होली मनाई जाती है। होलिका दहन आज की गई जबकि शुक्रवार को रंगों वाली खेली जाएगी। सनातन धर्म में होलिका दहन का खास महत्व है। जिले में वीरवार को होलिका पर्व धूमधाम से मनाया गया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होलिका दहन के लिए लकडियों, कंडे आदि एकत्रित किए गए थे। प्रात: से ही होलिका पूजन के लिए महिलाओं का तांता लगना शुरू हो गया था। महिलाएं परंपरागत वेशभूषा में होलिका पूजन करने के लिए पहुंची। होलिका दहन के एक दिन पूर्व वीरवार को नगर में कई स्थानों पर महिलाओं द्वारा होली का पूजन अर्चन किया गया। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है। माता गेट स्थित बाबा प्रसाद गिरी मंदिर के समीप बड़ी होली सहित अन्य स्थानों पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूजन अर्चन किया। महिलाओं ने होलिका की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की और अपनी संतानों की दीर्घायु के लिए होलिका से कामना भी की। छोटे बच्चे काजू, किशमिश, नारियल व मेवों से बनी मालाएं पहनकर पूजा-अर्चना के लिए आए। उनकी माताओं ने बच्चों का होलिका पर माथा भी टिकवाकर प्रार्थना की। पूजन सामग्री में हरे चने व गेहूं की बालियां की बिक्री होते हुए भी देखी गई। होलिका दहन में इनको होलिका को अर्पित किया जाता है। इसके अलावा शहर में विभिन्न स्थानों पर होली पूजन किया गया। महिलाओं ने होलिका का व्रत भी रखा और घरों में पकवान आदि भी बनाए। बाजारों में उपलों की मालाओं की भी खूब बिक्री हुई। उपलों से बनी इन मालाओं को होलिका को अर्पित किया गया। बाजारों में भी होली पर्व की धूम दिखाई दी। पिचकारी, गुलाल से शहर का मुख्य बाजार में रौनक दिखाई दी। बच्चों ने पिचकारियां व गुब्बारे आदि भी खूब खरीदे।