गांव दुजाना में नवाबी रियासत के चलते गांव का एक ही सैनिक 1962 भारत-चीन की लड़ाई में शहीद हुआ था, लेकिन अभी तक गांव में शहीद के नाम से कोई मूर्ति व स्मारक नहीं बनाया गया। परिजनों ने मांग की है कि गांव में शहीद बिशन दास की मूर्ति व स्मारक बनाया जाना चाहिए। भले ही गांव दुजाना में बने शहीद स्मारक पार्क के गौरव पट्ट पर प्रथम विश्व युद्ध से लेकर भारत-चीन युद्ध के वीरों के नाम लिखे हुए हो, लेकिन जिन वीरों के गौरव पट्ट पर नाम लिखे हुए वह गांव के दुजाना के आसपास गांवों के सैनिक थे, क्योंकि गांव दुजाना में तो नवाबी रियासत थी। जब भारत-पाकिस्तान अलग हुआ तो प्रथम विश्व युद्ध से लेकर भारत-चीन युद्ध के वीरों के परिजनों को गांव दुजाना में जमीन मिली थी, जिसके चलते अब गौरव पट्ट पर वीरों के नाम लिखे हुए हैं। बिशन दास 1959 में सेना में भर्ती हुए थे और 1962 में भारत-चीन की लड़ाई में शहीद हो गए थे। उनके नाम पर सरकार की तरफ से कोई शहीद स्मारक नही बनाया हुआ हैं। परिजनों की मांग है कि शहीद हुए बिशन दास के नाम पर गांव में शहीद की मूर्ति व स्मारक बनाया जाए। गांव दुजाना में नवाबों की रियासत थी और गांव दुजाना का एक सैनिक 1962 की लड़ाई में शहीद हुआ था। इसके अलावा कोई भी गांव सैनिक शहीद नहीं हुआ हैं। गांव के गौरव पट्ट पर जिन शहीदों के नाम लिखे हुए है, उनके परिजनों को जब भारत-पाकिस्तान अलग हुआ था। उसके बाद गांव के जमीन मिली थी।