जिले के गांव रईया में करीब 300 वर्ष पुराने शिव मंदिर के पुनर्निर्माण करने के बाद समस्त ग्रामीणों की तरफ से नर्मदा से लाकर शिव परिवार की मूर्ति व शिवलिंग की स्थापना की गई। शिव परिवार की स्थापना से पहले गांव के मुख्य मार्ग से महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। इसमें हजारों की संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। लाल-पीले परिधान में जहां महिलाएं कलश लेकर चल रही थी, वहीं पुरुष श्रद्धालु भी गेरुआ वस्त्र धारण करके धार्मिक ध्वज हाथों में लेकर चले। इस दौरान श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं का जयकारा लगाया। इस दौरान आसपास का पूरा माहौल भक्तिमय हो गया था। कलश यात्रा में डीजे, ढोल-नगाड़ों के धार्मिक गानों पर लोग जमकर थिरके हैं। कलश यात्रा दादा भईया मंदिर परिसर से निकलकर पूरे गांव में से होते हुई निकाली गई। इस दौरान गलियों से होते हुए कलश यात्रा शिव मंदिर में पहुंची। कलश यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा भी की गई। वहीं कलश यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने ट्रैक्टर-ट्रालियों के माध्यम से शिव परिवार की अलग-अलग झांकियां भी निकाली। इस मंदिर के निर्माण से पहले श्रद्धालु अपनी कावड़ को शिव के भगवत धाम पर चढ़ाते थे। मंदिर के पूर्ण निर्माण के बाद अब गांव के शिव भगत इस मंदिर में गंगा के जल से जल अभिषेक करेंगे। वहीं बुधवार को इस उपलक्ष्य में मंदिर के प्रांगण में भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। कलश यात्रा के बाद से ग्रामीणों ने भंडारे के आयोजन की तैयारी शुरू कर दी है। शिव परिवार के स्थापना से गांव में खुशी का माहौल बना हुआ है। लोगों ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। ग्रामीणों ने बताया गया कि उनके गांव में करीब 300 वर्षों से श्री शिव मंदिर स्थापित है। नर्मदा से लाकर शिव परिवार व शिवलिंग प्रतिमाओं का पुनर्स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पांच दिवसीय महायज्ञ का आयोजन किया गया है। मंगलवार को शिव परिवार की प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। वहीं आज महाशिवरात्रि पर शुद्ध देसी घी के भंडारे का आयोजन किया जाएगा। महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालु डाक-कावड़ लाकर गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे। इससे पहले गांव के श्रद्धालु बाघोत गांव स्थित शिव धाम पर अपनी कावड़ को चढ़ाते थे। इस अवसर पर गांव की युवाओं की मंडली डाक कावड़ लेने के लिए हरिद्वार गई हुई है।