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झज्जर में 2500 की आबादी वाले बिहासन में हर घर से सेना में जवान

नवीन दलाल Updated Thu, 08 May 2025 02:16 PM IST

पूर्व थल सेनाध्यक्ष दलबीर सुहाग का गांव बिसहान सेना के प्रति जोश के लिए अपनी अलग पहचान रखता है। गांव का शायद ही कोई कुनबा हो, जिससे कोई न कोई सदस्य भारतीय सेना में कार्यरत न हो। करीब ढाई हजार की आबादी में सिमटे गांव के हर घर से सेना की किसी न किसी कोर में एक युवा देश वा में है या रह चुका है। सबसे ज्यादा सेवानिवृत सैनिक भी बिसहान गांव से हैं। इस समय भी गांव के 250 से ज्यादा सैनिक देश सेवा में कार्यरत हैं। इसके अलावा गांव से सेना के लिए 54 अफसर निकले हैं। सेना में बड़े पदों पर आर्मी चीफ दलबीर सुहाग, कर्नल धर्मबीर सुहाग, मेजर जनरल सुनील सुहाग, रिटायर्ड मेजर जरनल भीम सिंह सुहाग, कर्नल राजेन्द्र सिंह सुहाग निकले हैं। इसी प्रकार एक दर्जन से अधिक ऑनरेरी कैप्टन हैं। बिसहान के 22 लाल अफसर के पद पर अपनी अपनी सेवा दे रहे हैं। ज्यादातर युवा थल सेना में तैनात हैं। पूरे गांव में इकलौते एयरफोर्स में ऑनरेरी फ्लाइंग अफसर से रिटायर्ड राजपाल सुहाग ने बताया कि बिसाहन गांव के लोगों को आजाद हिंद फौज से सेना में जाने की प्रेरणा मिली थी। 4 जवान आजाद हिंद फौज में भर्ती हुए थे। दूसरे और चौथे विश्व युद्ध में चार जवान शहीद हुए थे। 1961 और 1965 की लड़ाई में भी चार जवान शहीद हुए थे। स्कूल के मैदान में ही दौड़ लगाकर करते हैं तैयारी बिसहान गांव के सरकारी स्कूल के खेल मैदान को ही समतल करवाया गया था। यहीं पर युवा सेना में भर्ती होने के लिए प्रैक्टिस करते हैं। समय-समय पर पूर्व सैनिकों का तो मार्गदर्शन लेते ही हैं। वहीं काफी संख्या में युवा रोहतक, चंडीगढ़ और दिल्ली की एकेडमी में कोचिंग लेते हैं।

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