धर्मनगरी बेरी में बंसत पंचमी का त्यौहार हर वर्ष की तरह मनाया गया। बेरी के छाज्याण पाना में स्थित बौड़ा कुआं धाम में हर साल की तरह बाबा की समाधि पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था व विश्वास के साथ माथा टेककर आर्शीवाद प्राप्त किया। बंसत पंचमी के दिन बौड़ा कुआं धाम पर दर्जनों गांवों के अलावा पूरे राज्य से भक्त पहुंचते है। मंदिर परिसर में हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन भी किया गया। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने आहुति डाली व प्रसाद ग्रहण किया। भक्त वीरेंद्र डरोलिया ने बताया कि हर वर्ष बंसत पंचमी के दिन पाना छाज्याण में स्थित बौड़ा कुआं में विशाल भंडारे का आयोजन करवाया जाता है। बाबा की समाध पर माथा टेकने के लिए आसपास क्षेत्र के अलावा दूर-दराज से भक्त आते है और मंदिर में माथा टेककर भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते है। महिलाएं मंगल गीत गाते हुए बाबा की समाधि तक पहुंची। भक्तों की माने तो यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। मंदिर के बाहर विशाल मेला लगा बंसत पंचमी के दिन भंडारे के आयोजन के साथ-साथ मंदिर के बाहर मेला लगता है, मेले में बच्चों व महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह हम शिवरात्री पर भगवान शिव की अराधना करते है उसी तरह बंसत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते है आज के दिन व्रत करने से ज्ञान की वृद्धि होती है। केवल विद्यार्थियों को ज्ञान की जरूरत बल्कि हर व्यक्ति को ज्ञान की आवश्यकता है इसलिए आज के दिन सभी लोग मिलकर मां सरस्वती की अराधना करते है। मां सरस्वती की आज के दिन ही होली का डंडा गड़ जाता है जिसका होली के दिन दहन किया जाता है।