संवाद न्यूज एजेंसी बहादुरगढ़। बरसात शुरू होने से पहले कुल्ताना-छुड़ानी-बुपनिया (केसीबी) ड्रेन की सफाई के सिंचाई विभाग के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। बहादुरगढ़-बादली रोड पर गांव लुक्सर के पास ड्रेन की स्थिति देखकर विभाग की तैयारियों की पोल खुलती नजर आ रही है। यहां ड्रेन के किनारों को मजबूत करने के नाम पर केवल बांध बनाकर मिट्टी डाल दी गई, जबकि ड्रेन के भीतर वर्षों से जमी गाद और फैली जलकुंभी को नहीं हटाया गया। ऐसे में किसानों को आशंका है कि तेज बारिश होने पर पानी की निकासी बाधित होगी और हर साल की तरह खेतों में जलभराव होगा। किसान अजीत, रमेश, सुरेश और नरेश ने बताया कि आरडी-5510 के आसपास काफी हिस्से में ड्रेन की सफाई नहीं की गई है। ड्रेन में भारी मात्रा में जलकुंभी फैली हुई है और गाद भी जमी हुई है। यदि अच्छी बारिश हुई तो पानी की निकासी रुक जाएगी और गांव छुड़ानी सहित आसपास के 500 एकड़ से अधिक कृषि क्षेत्र में जलभराव हो जाएगा। इससे धान, बाजरा और अन्य फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि हर वर्ष विभाग ड्रेन की सफाई के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन धरातल पर केवल खानापूर्ति होती है। नतीजा यह होता है कि बारिश के दिनों में खेत तालाब बन जाते हैं और किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। उनका आरोप है कि समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय केवल औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। किसानों का कहना है कि यदि सफाई का कार्य समय रहते पूरा नहीं हुआ तो पहली तेज बारिश ही विभाग के दावों की हकीकत सामने ले आएगी और एक बार फिर सैकड़ों एकड़ फसल जलभराव की भेंट चढ़ जाएगी। वहीं सिंचाई विभाग के एसडीओ वेदपाल दहिया का कहना है कि ड्रेन की एक बार सफाई कराई जा चुकी है। उनके अनुसार फिलहाल ड्रेन के किनारों को मजबूत करने का कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि जलकुंभी पानी की निकासी में बाधा नहीं बनती और अगले एक माह के भीतर ड्रेन की दोबारा सफाई भी कराई जाएगी।