हिसार के गांव खेड़ी बरकी निवासी सुमित्री देवी ने एचएयू में आयोजित किसान मेले में अपना स्टॉल लगाया है। सुमित्रा कई तरह के अचार, मुरब्बे, हल्दी सहित अन्य उत्पाद लेकर पहुंची हैं। सुमित्रा ने बताया कि पहले एक एकड़ में सामान्य खेती करते थे तो उनको कुछ बचत नहीं होती थी। बाद में उन्होंने अपने खेत में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की। इसके बाद उन्हें उत्पादन कम मिला लेकिन फसलों के दाम थोडे अधिक मिले। सुमित्रा देवी ने बताया कि उन्हाेंने पति नरेश कुमार के संग आचार-मुरब्बा व चटनी बनाने की शुरुआत की। इसके लिए 2022 में एचएयू के साइना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी में दोनों ने 5-5 दिन की ट्रेनिंग ली, जिसमें उन्होंने आचार-मुरब्बा व चटनी बनाने का प्रशिक्षण सीखा। अनुसूचित वर्ग से संबंध रखने पर सरकार की ओर से 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की, जिससे उन्होंने आचार व अन्य सामग्री बनाने के लिए उपकरण खरीदे। सदलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. नरेंद्र कुमार के सानिध्य में भी उन्होंने कई मेले में भाग लेकर रोजगार स्थापित करने के टिप्स लिए। अपने खेत के आर्गेनिक उत्पादों का खुद ही उपयोग कर उनके उत्पाद बनाकर बेचे के सामान्य खेती से तीन गुणा फायदा मिला। अब प्रति माह 60 हजार रुपये की बचत करते हैं। आज के दिन यह दंपती 65 प्रकार के आचार, 15 प्रकार के मुरब्बे, 7 प्रकार की चटनी, दो प्रकार की आंवला कैंडी व आंवला लड्डू बनाकर स्वरोजगार को मजबूत दिशा दे रहे हैं। इन आचार-मुरब्बे व चटनी की मांग पंजाब, राजस्थान, हनुमानगढ़, लुधियाना, उत्तर प्रदेश सहित हरियाणा के विभिन्न जिलों में है।