गांव सदलपुर की रहने वाली प्रोमिला को प्रगतिशील किसान का अवार्ड दिया गया है। एमए, बीएड़, एमफिल,नेट, पीएचडी करने के बाद मैंने सामाजिक सेवा तथा कृषि को चुना। कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क में आए तो कीटनाशकों व खाद के अधिक प्रयोग से होने वाले नुकसानों के बारे में जानकारी मिली। कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर जैविक खेती के बारे में जानकारी ली। इसके अपनी चार एकड़ में हमने बिना कीटनाशकों व कृत्रिम खादों का उपयोग किए जैविक खेती की शुरुआत की। अब खेती में कीटनाश का स्प्रे नहीं करते, लोगों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करते हैं। अगले सीजन से सब्जियों व बागवानी का एरिया भी बढाएंगे। खेती के साथ पशुपालन भी कर रहे हैं। हमारे पास देसी गाय तथा भैंस हैं। पांरपरिक तरीके से अपने घर के लिए दूध, दही, घी तैयार करते हैं। गांव के स्कूल, पंचायत में जाकर लोगों को खेती के लिए प्रेरित करती हूं।गांव के काफी लोग अब जैविक व प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं। आने वाले समय में इसका दायरा काफी बढ़ने वाला है। हमें बीमारियों से बचने के लिए जहर मुक्त खेती की ओर जाना ही होगा।