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हिसार: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में एक्वा उद्यम-2026 का हुआ शुभारंभ

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (मैनेज) हैदराबाद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित चार दिवसीय एक्वा उद्यम-2026 का शुभारंभ हुआ। मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में आयोजित मत्स्य उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत सोमवार को मत्स्य स्टार्टअप एवं एक्वापे्रन्योरशिप हितधारकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज मुख्य अतिथि जबकि कृषि विस्तार (मैनेज) के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सरवनन राज विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। मंच पर विभागाध्यक्ष डॉ. दलीप कुमार बिश्नोई भी मौजूद रहे। प्रो. काम्बोज ने अपने सम्बोधन में कहा कि मत्स्य क्षेत्र से नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी। देश में मत्स्य क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। यह न केवल पोषण सुरक्षा का आधार है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण साधन भी है। ऐसे समय में एक्वा उद्यम 2026 कार्यक्रम अत्यंत प्रासंगिक है। एक्वा उद्यम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि जलीय संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से स्थानीय स्तर पर आजीविका उत्पन्न करना, युवाओं को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार के अवसर पैदा करना और मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना है। यह क्षेत्र ग्रामीण आजीविका, आत्मनिर्भरता और मत्स्य आधारित उत्पाद बनाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कुलपति ने बताया कि आज कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रही, इसलिए हमें कृषि को बहु-आयामी दृष्टिकोण से देखना होगा जिसमें बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन तथा मत्स्य पालन जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण है। मत्स्य क्षेत्र में रोजगार की भी अपार संभावनाएं हैं। यह पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में जहां जल संसाधनों का सुनियोजित उपयोग संभव है वहां वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि डॉ. सरवनन राज ने बताया कि यह मंच नए उद्यमियों और नीति निर्माताओं के बीच सेतु का कार्य करेगा। मत्स्य पालन के व्यवसाय में रोजगार एवं उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। किसान कृषि कार्य के साथ-साथ मत्स्य पालन को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि चार दिवसीय कार्यक्रम के तहत पहले दिन एक्वापे्रन्योरशिप हितधारकों की बैठक, दूसरे व तीसरे दिन एक्वा युवाओं की बैठक तथा चौथे दिन एक्वा उद्यमियों की बैठक आयोजित की जाएगी। मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा ने कार्यक्रम में सभी का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा मत्स्य पालन के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में डॉ रचना गुलाटी ने धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। मंच का संचालन डॉ. अनुपम ने किया। इस अवसर कुलसचिव सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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