गांव खेड़ी बरकी निवासी नरेश को अचार मुरब्बा बनाने के लिए सम्मानित किया गया। नरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने 2022 में अचार -मुरब्बा बनाने का काम शुरु किया था। वह करीब 50 तरह के आचार बनाते हैं। जिसमें कैमिकल का प्रयोग नहीं करते। उनके आचार-मुरब्बे की डिमांड दूसरे प्रदेशों से भी आ रही है। उन्होंने बताया कि वह सोशल मीडिया पर मून पिकल के नाम से अपने उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं। नरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ 2022 में एचएयू के साइना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी में दोनों ने 5-5 दिन की ट्रेनिंग ली थी। जिसमें उन्होंने आचार-मुरब्बा व चटनी बनाने का प्रशिक्षण सीखा। अनुसूचित वर्ग से संबंध रखने पर सरकार की ओर से 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की, जिससे उन्होंने आचार व अन्य सामग्री बनाने के लिए उपकरण खरीदे। सदलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. नरेंद्र कुमार के सानिध्य में भी उन्होंने कई मेले में भाग लेकर रोजगार स्थापित करने के टिप्स लिए। उसके बाद समय-समय पर सेमिनार व मेले में भाग लेकर आचार-मुरब्बा व चटनी से बने खाद्य सामग्री की स्टालें लगा कर अचार ,मुरब्बा उपलब्ध कराते हैं। 15 प्रकार के मुरब्बे, 7 प्रकार की चटनी, दो प्रकार की आंवला कैंडी व आंवला लड्डू बना रहे हैं। आचार-मुरब्बे व चटनी की मांग पंजाब, राजस्थान, हनुमानगढ़, लुधियाना, उत्तर प्रदेश सहित प्रदेश के अधिकतर जिलों में है।