भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के बैनर तले किसानों मंगलवार को लघु सचिवालय का घेराव किया। किसानों ने क्रांतिमान पार्क से लघु सचिवालय तक पैदल मार्च निकाला। किसानों ने अमेरिका ट्रेड डील को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कृषि, चिकित्सा, शिक्षा और बिजली से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहादुरी दिखाते हुए अमेरिका का विरोध करना चाहिए। उन्होंने 23 मार्च को पीपली में प्रस्तावित रैली के लिए किसानों को आमंत्रित किया। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कृषि को लेकर हुई ट्रेड डील किसानों के हितों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद सस्ती दरों पर भारत में आए तो देश के किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलेगा। इससे करोड़ों किसान आर्थिक संकट में फंस सकते हैं और देश की खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा सकता है। उन्होंने मांग की कि इस डील को तुरंत वापस लिया जाए और किसान संगठनों से चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना था कि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज महंगा होता जा रहा है और दवाइयों की कीमतों पर कोई ठोस नियंत्रण नहीं है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और जांच सुविधाओं की कमी से आमजन परेशान है। मांग की गई कि आम जनता को भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की तरह मुफ्त या सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। शिक्षा के मुद्दे पर भी किसानों ने नाराजगी जताई। निजी स्कूलों में बढ़ती फीस, हर साल किताबें बदलने और निर्धारित दुकानों से सामान खरीदने की शर्तों को गलत बताया गया।