संवाद न्यूज एजेंसी हांसी। शहर में सोमवार को डोर-टू-डोर कचरा उठाने की व्यवस्था प्रभावित हो गई। कचरा उठान का कार्य करने वाली निजी एजेंसी के कच्चे कर्मचारियों ने चार महीने से नियमित वेतन न मिलने का आरोप लगाते हुए हड़ताल कर दी। कर्मचारियों ने सभी ऑटो-टिप्पर एक खाली प्लॉट में खड़े कर ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं नगर परिषद ने एजेंसी पर करीब साढ़े छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। हड़ताल पर बैठे कमल कर्मचारी का आरोप है कि उन्हें पिछले करीब चार महीनों से पूरा वेतन नहीं मिला। उनका कहना है कि हाल ही में उनके खातों में केवल 5 हजार रुपये डाले गए। जब उन्होंने वेतन का हिसाब मांगा तो ठेकेदार ने उन्हें काम से हटाने की बात कह दी। रितेश कुमार ने कहा कि वह लगातार चार महीने से काम कर रहे हैं, लेकिन पूरा भुगतान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि वेतन मांगने वाले 19 कर्मचारियों को कार्य संबंधी व्हाट्सएप ग्रुप से भी हटा दिया गया। साथ ही अन्य कर्मचारियों के ऑटो-टिपर वार्डों में भेजकर फर्जी हाजिरी लगाने का भी आरोप लगाया गया है। कर्मचारी राहुल कुमार का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी वेतन समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें हड़ताल करनी पड़ी थी। उनका आरोप है कि ठेकेदार जानबूझकर आर्थिक शोषण कर रहा है। ताकि कर्मचारी मजबूर होकर नौकरी छोड़ दें और उनका बकाया वेतन भी न देना पड़े। वहीं ठेकेदार शुभम ने कहा कि ट्रिपर कर्मचारी समय पर काम नहीं करते। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने जितना काम किया, उसी के अनुसार उनके खातों में वेतन डाला गया है। हालांकि, कर्मचारियों को काम से हटाए जाने के सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। एजेंसी ने मार्च महीने का बिल एक महीने देरी से दिया था। यह सारा कार्य ऑनलाइन होता है। इस पर करीब साढ़े लाख रुपये का जुर्माना बिल देरी देने से लगा है। बाकी कर्मचारियों की हड़ताल का हमें जानकारी नहीं, यह एजेंसी को देखना है।- राजेंद्र सोनी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद