आशा वर्कर्स ने न्यूनतम वेतन 26000 रुपये करने तथा चारों लेबर कोड्स को रद्द करने की मांग को लेकर मंत्री रणबीर गंगवा के आवास पर प्रदर्शन किया। आशा वर्कर्स एंड फैसिलिटेटर फेडरेशन के आहवान पर हरियाणा प्रदेश की आशाओं ने मंत्री आवास पर जोरदार सांकेतिक धरना दिया। मांग परियोजना कर्मचारियों के तीसरे दिन के आशा वर्कर्स यूनियन की सदस्यों ने प्रदर्शन किया। हिसार, सिरसा, फतेहाबाद की आशाएं वर्कर्स दर्शाना, शीला, सीमा की अध्यक्षता में प्रदर्शन करने पहुंची। सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान, सचिव मनोज कुमार, उप प्रधान सतवीर सिंह, जिला प्रधान कामरेड सुरेश, आशा वर्कर्स यूनियन की अनीता, शीला, पिंकी, दर्शाना, सुमन, सविता , मीरा,सुमन,निर्मला, कृष्णा, राजबाला,रानी आदि ने संबोधित किया। यूनियन नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई पॉलिसी के अनुसार आशा वर्कर्स को वालंटियर के रूप में कार्य करते हुए 20 वर्ष पूरे हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को सुधारने में और कोरोना महामारी में वोलंटियर कहीं जाने वाली आशा वर्कर्स ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोरोना महामारी में आशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए डब्ल्यूएचओ ने आशाओं को ग्लोबल हेल्थ लीडर के अवार्ड से सम्मानित किया है। केंद्र और राज्य सरकार आशा वर्कर्स के महत्वपूर्ण कार्यों को अनदेखा कर रही है। लंबे समय से आशा वर्कर्स के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। आशा वर्कर्स पर बिना संसाधन और बिना प्रोत्साहन राशि दिए कई तरह के एप में ऑनलाइन काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। बेवजह के बढ़ते कामों की वजह से तमाम आशा वर्कर्स परेशान हैं। पिछले 12 वर्ष से केंद्र सरकार ने आशाओं के इंसेंटिव बेस कार्यों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है ।