अग्रोहा शक्ति पीठ पर चल रही तीन दिवसीय अग्र भागवत कथा का सोमवार को हवन यज्ञ कर विधिवत समापन हुआ। इस दौरान कथा के तृतीय दिवस में कथा वाचक महामंडलेश्वर स्वामी नर्मदा शंकर पूरी ने अठारह पुत्रों एवं अठारह गोत्रों का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा में बताया गया कि जब अग्रोहा नगरी में अकाल और अतिवृष्टि हुई तो महाराजा अग्रसेन जी ने माता लक्ष्मी को स्मरण किया। माता लक्ष्मी शक्ति स्वरूप प्रकट होकर अग्रसेन जी को आशीर्वाद देती हैं और इंद्र का अभिमान दूर होता है। अग्रसेन जी ने अठारह पुत्रों को ऋषि गोत्रों में विभाजित कर अलग-अलग गांव प्रदान किए और गोत्रों में एक दूसरे के साथ विवाह की परंपरा स्थापित की। उन्होंने यज्ञों में पशुबलि का विरोध कर क्षत्रिय वर्ण त्याग वैश्य धर्म को स्वीकार किया। महाराजा अग्रसेन जी ने 108 वर्ष की आयु पूर्ण कर भगवान के धाम को प्रस्थान किया। इस दौरान कथावाचक महामंडलेश्वर स्वामी नर्मदा शंकर पूरी जी ने सत्ताईस अध्यायों की सारगर्भित कथा का विशद वर्णन किया और उपस्थित जनसमूह को महाराजा अग्रसेन जी के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प दिलाया। समापन अवसर पर यज्ञ का आयोजन हुआ।