गांव धान्सू में करीब 250 एकड़ में अब भी जलभराव है। बारिश के समय हुए इस जलभराव की निकासी आज तक नहीं हो सकी है। धान्सू गांव के लोगों ने इसको लेकर पिछले दिनों विरोध जताया था। जिसके बाद प्रशासन की कुछ टीमें शनिवार को हिसार पहुंची। पटवारी तथा तहसीलदार ने मौके का मुआयना किया। ग्रामीणों ने फसल की बिजाई न होने पर मुआवजे की मांग की है। जिले के 90 गांवों में मानसून सीजन में भारी जलभराव होने से फसलें खराब हुई थी। जिले के अधिकतर गांवों में पानी की निकासी हो चुकी है। जिले के 8 गांवों में अब भी जलभराव है। जिस कारण इन खेतों में गेहूं की बिजाई नहीं हो सकी। खेतों में चार महीने बाद भी पानी नहीं निकाला जा सका।आर्यनगर गांव में करीब करीब 100 एकड़ में अब भी पानी भरा हुआ है। जिसमें बिजाई नहीं हो सकेगी। सिंचाई विभाग, पंचायत विभाग, पीडब्ल्यूडी के करीब 350 पंपों के जरिए पानी निकाला गया। सिंचाई विभाग ने पानी को निकालने के लिए 30 सितंबर तक 2025 का समय मांगा था।प्रदेश सरकार की ओर से सिंचाई विभाग को पानी निकासी का काम हर हाल में 1 अक्तूबर 2025 से पहले पूरा करने के आदेश दिए गए थे। गांव दाहिमा, कैमरी, लाडवा, सातरोड, सुलतानपुर, गंगवा, पातन, सीसवाला, रावलवास ,सिंहवा राघो, गुराना, डाटा, आर्यनगर, लितानी सहित अन्य गांवों सबसे अधिक जलभराव हुआ था।