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फतेहाबाद के गांव पारता में अ आवासीय संस्कार शिविर जारी, 100 बच्चे ले रहे है शिक्षा

जिले के बिश्नोई समाज के बच्चों के लिए एक गैर आवासीय संस्कार शिविर गांव पारता के श्रीगुरु जम्भेश्वर मंदिर व धर्मशाला ट्रस्ट में आयोजित किया जा रहा है। जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर व श्रीगुरु जंबेश्वर धर्मशाला व मन्दिर कमेटी के तत्वावधान ने चल रहे इस पांच दिवसीय संस्कार शिविर में बच्चों को श्रीगुरु जाम्भोजी की शब्दवाणी, जीवन दर्शन, जाम्भाणी संत साहित्य, बिश्नोई के इतिहास, परम्परा, जीवन शैली, स्वास्थ्य, नैतिक शिक्षा, कैरियर गाइडेंस आदि के बारे में अवगत कराया जा रहा है। शिविर के दौरान विभिन्न प्रकार की गतिविधिया जिनमें नैतिक शिक्षा पर आधारित कक्षाएं, पर्यावरण संरक्षण संबंधी जानकारी और व्यावहारिक गतिविधियां शामिल है। शिविर में 13 वर्ष से 17 वर्ष आयु तक के बिश्नोई समाज के 100 बच्चे भाग ले रहे है। इसे लेकर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ना और उनमें अच्छे संस्कार विकसित करना है। आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखना अत्यंत आवश्यक है और इस प्रकार के शिविर बच्चों को सही दिशा और प्रेरणा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिविर में अनुभवी विद्वानों और समाज के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा बच्चों का मार्गदर्शन किया जा रहा है ताकि बच्चे अपनी संस्कृति और मूल्यों को आत्मसात कर सकें। यह शिविर बच्चों के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ये संस्कार शिविर पूरे भारत में 15 अलग-अलग स्थानों पर समाज के महान् संतों की देखरेख में आयोजित हो रहे है। शिविर में भोजन ,पानी, जगह, व्यवस्था तमाम जिम्मेदारी स्थानीय संस्था द्वारा दी जा रही है। शिविर में प्रमाण पत्र व प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों की व्यवस्था जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर की तरफ से दिए जाएंगे। अमित बैनीवाल व संस्था के गणमान्य व्यक्तियों ने कहा कि यह संस्कार शिविर निश्चित रूप से बिश्नोई समाज के बच्चों के लिए एक अनूठा अनुभव साबित होगा, जिसमें उन्हें अपनी संस्कृति को गहराई से जानने और एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी जा रही है।

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