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राजस्थान जल समझौते का इनेलो ने किया विरोध, कहा-हरियाणा के जल अधिकारों पर समझौता स्वीकार नहीं

Nivedita Updated Mon, 29 Jun 2026 04:17 PM IST

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा और राजस्थान के बीच हुए हालिया जल समझौते का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि उनकी पार्टी राज्य के जल अधिकारों पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने हरियाणा के हितों की अनदेखी करते हुए राजस्थान के साथ समझौता किया है, जबकि एसवाईएल नहर का निर्माण आज भी अधूरा है और राज्य लगातार जल संकट का सामना कर रहा है। चंडीगढ़ में इनेलो मुख्यालय पर प्रेस वार्ता के दौरान प्रो. संपत सिंह ने कहा कि हरियाणा के गठन के बाद राज्य को यमुना जल पर वैधानिक अधिकार मिला था, लेकिन 1994 के समझौते में हरियाणा की हिस्सेदारी घटा दी गई। इससे पहले राजस्थान और दिल्ली को केवल अतिरिक्त उपलब्ध जल दिया जाता था, जिसे बाद में स्थायी आवंटन का स्वरूप दे दिया गया। उन्होंने रेणुका, किशाऊ और लखवार-व्यासी जैसी परियोजनाओं के वर्षों से लंबित रहने तथा मसानी जलाशय से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में तत्कालीन नेता चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इनेलो के 17 विधायकों ने जल समझौते के विरोध में इस्तीफा देकर हरियाणा के हितों की लड़ाई लड़ी थी। प्रो. संपत सिंह ने भाजपा और कांग्रेस पर राज्य के जल अधिकारों की रक्षा में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि इनेलो लोकतांत्रिक तरीके से हरियाणा के पानी की एक-एक बूंद की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही चौधरी अभय सिंह चौटाला के नेतृत्व में पार्टी की बैठक बुलाकर आगामी रणनीति तय की जाएगी।

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