पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के संभावित गठबंधन की अटकलों को फिलहाल झटका लगा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब भाजपा नेतृत्व के स्पष्ट बयानों ने गठबंधन की उम्मीदों पर विराम लगा दिया है। भाजपा ने संकेत दिया है कि वह राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी का संदेश है कि उसका असली गठबंधन पंजाब की जनता के साथ है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद गठबंधन की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। हालांकि, दोनों पक्षों ने मुलाकात के बाद कोई औपचारिक घोषणा नहीं की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े गठबंधन की संभावित ताकत का संकेत देते हैं। पंजाब जैसे बहुकोणीय चुनाव में यह संभावित संयुक्त आधार दोनों दलों को कई सीटों पर मजबूत मुकाबले में ला सकता है। 2024 में भाजपा 18.56 फीसदी वोट के बावजूद एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई थी, जबकि अकाली दल 13.42 फीसदी वोट के साथ एक सीट जीत सका। नायब सैनी के बयान ने गठबंधन की चर्चाओं पर फिलहाल रोक लगा दी है। इससे अकाली दल के उन नेताओं की बेचैनी बढ़ी है जो पारंपरिक गठबंधन को चुनावी तौर पर बेहतर विकल्प मानते हैं। भाजपा नेतृत्व का यह रुख पंजाब की राजनीतिक फिजा को बदल रहा है। अकाली-भाजपा गठबंधन अब केवल राजनीतिक इच्छा नहीं, बल्कि दोनों दलों के लिए चुनावी गणित और अस्तित्व का सवाल बनता दिख रहा है। भाजपा का कहना है कि उसका असली गठबंधन पंजाब की जनता के साथ है।