शहरों में लगातार घटती चिड़ियों की संख्या के बीच आजाद नगर के एक युवा ने ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो न केवल प्रकृति प्रेम को दर्शाता है बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है। जहां लोग छतों को कंक्रीट में बदलकर पक्षियों के लिए जगह खत्म कर रहे हैं, वहीं आजाद नगर निवासी संदीप ने अपनी छत को चिड़ियों का सुरक्षित घर बना दिया है। बीते एक दशक से संदीप चिड़ियों की सेवा और संरक्षण में जुटे हैं और आज उनके घर की छत पर करीब 50 घोंसले लगे हुए हैं, जिनमें लगभग 100 चिड़ियां सुरक्षित जीवन जी रही हैं। आजाद नगर निवासी संदीप ने बताया कि चिड़ियों से उनका यह सफर वर्ष 2014 में शुरू हुआ। उस समय मैं दसवीं कक्षा में पढ़ता था। मेरे घर की छत पर एक गौरैया ने अपना घोंसला बनाया था, जिसमें उसके दो बच्चे भी थे। रोजाना उस चिड़िया को अपने बच्चों के लिए दाना-पानी लाते देखना मुझे बेहद सुकून और खुशी देता था। वह दृश्य उनके मन में बस गया। हमें घर की छत पक्की करवानी थी। उस समय मेरे मन में सबसे बड़ी चिंता यह थी कि छत बनने के बाद वह गौरैया अपना घोंसला कहां बनाएगी और अपने बच्चों को लेकर कहां जाएगी। इसी सोच ने मुझे समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। मैंने एक लकड़ी का बॉक्स बनवाया और उसे उसी घोंसले के पास टांग दिया, ताकि चिड़िया को परेशानी न हो।