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विश्व पटल पर छाई मिनी ब्राजील कहे जाने वाली भिवानी के गांव अलखपुरा की बेटियां, सात का इंडिया की टीमों में चयन

मिनी ब्राजील कहलाने वाले भिवानी जिले के गांव अलखपुरा की बेटियां विश्व स्तर पर बुलंदियां छू रही हैं। फिलहाल गांव की सात बेटियों का भारतीय टीमों में चयन हुआ है। गांव की 30 से ज्यादा बेटियां भारतीय सेना व रेलवे में नौकरी लग कर आत्मनिर्भर हो चुकी हैं और अपने परिवार का पालन पोषण तक करने लगी है। गांव अलखपुरा को पिछले दो दशक पहले तक बॉलीवुड की स्टार मल्लिका सेहरावत और उससे पहले उनके पड़दादा एवं देश आजाद होने से पूर्व सबसे बड़े दानवीर सेठ छाजुराम लांबा के नाम से जाना जाता था। पर अब अलखपुरा गांव की पहचाना उसकी बेटियों की बदौलत होने लगी है। वो बेटियां, जो फुटबॉल में गांव का नाम विश्व स्तर पर चमकाने लगी हैं। बता दें कि इस गांव की लगभग हर बेटी फुटबॉल खेलती है। कई बार नेशनल व इंटरनेशनल लेवल पर मेडल पाकर नौकरियां पा चुकी हैं। गांव में फुटबॉल कोच सोनिका बिजारनिया ने बताया कि इस गांव के सरकारी स्कूल के पीटीआई गोवर्धन शर्मा ने साल 2005 के आसपास लड़कों को कबड्डी खिलाना शुरू किया। फिर लड़कियां भी खेलने लगी। पर लड़कों का खेल प्रदर्शन अच्छा नहीं था तो उन्होंने लड़कियों को फुटबॉल खिलाना शुरू किया। देखते ही देखते लड़कियों ने जिला स्तर से स्टेट लेवल पर मेडल जीते। इसके बाद गांव की लड़कियों का रुझान बढ़ा तो बेटियों ने 10 बार सुब्रतो कप में भाग लिया। कोच सोनिका ने बताया कि फिलहाल अलखपुरा गांव की 7 बेटियों को इंडिया टीमों में चयन हुआ है। जिसमें संजू यादव का सीनियर भारतीय टीम में, पूजा जाखड़, मुसकान, पारुल, हिमांशु व रितु का अंडर-20 तो स्वेता का अंडर-17 टीम में चयन हुआ है। ये सभी बेटियां कैंप में शामिल होने अलग अलग राज्यों में और संजू टर्की गई हुई हैं। कोच का कहना है कि ये बेटियां नाम व दाम दोनों कमा रही है। पूजा जाखड़ के पिता का निधन हो चुका है। वो महज 18 साल की हैं पर अपनी मेहनत से पाए मेडल व स्कॉलरशिप से अपने पूरे परिवार का पालन पोषण कर करती है। कोच का कहना है कि आधुनिक उपकरण मिलते रहे तो हमारी बेटियां और बेहतर कर सकती हैं। वहीं फुटबॉल खेल रही बेटी एवं हाल ही में सेना में चयनित पायल व अंजली ने बताया कि गांव की 200 से ज्यादा लड़कियां फुटबॉल खेलती हैं। जैसे जैसे पहले लड़कियों के मेडल आए तो हर घर की हर बेटी का रुझान बढ़ा। वो कहती हैं कि हमारा लक्ष्य गांव व देश का नाम रोशन करना और आत्मनिर्भर बनना है। संवाद

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