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मेरा गांव मेरी शान: दिनोद की धरा पर पैदा हुए संत ताराचंद महाराज की वाणी से विश्व भर में फैला राधा स्वामी नाम

दिनोद की धरा पर पैदा हुए संत ताराचंद महाराज की वाणी का ऐसा जादू लोगों के दिलो दिमाग पर छाया कि वे राधा स्वामी संप्रदाय के प्रचारक बनकर विश्व भर में प्रसिद्ध हो गए। उनके बाद संत हुजूर कंवर महाराज ने राधा स्वामी संत संप्रदाय की गद्दी संभाली। छोटे से गांव दिनोद की धरा पर लाखों लोग संत समागम के जरिए धर्म से जुड़ संस्कृति और बुराईयों से मुक्त होकर मानवता की विचाराधारा में रमकर सतकर्म और सदमार्ग पर चलने लगे। संत हुजूर कंवर महाराज ने बताया कि गुरु परमसंत ताराचंद महाराज गांव दिनोद में ही पैदा हुए थे। बाल्यकाल से ही भक्ति में ली रहते थे और ताउम्र बाल ब्रह्मचारी रहे। कड़ी तप साधना और त्याग की मूर्ति रहे। खुद का कमाया खाते थे। मास्टर राम सिंह जूई से थे। वे उनके गुरु थे। जिनसे राधा स्वामी नाम की शिक्षा पाई। आज से 70 साल पहले राधा स्वामी नाम को यहां कोई नहीं जानता था, इक्का-दुक्का सत्संगी आगरा से था। महाराज ने शुरू में राधा स्वामी नाम का प्रचार किया। गांव के महिला पुरुष जाते थे तो वे महाराज के उच्च चरित्र से बड़े प्रभावित थे। तन पर कपड़ा भी नहीं रखते थे। खुद खाना बनाकर खाते थे, सत्संगियों को भी अपने हाथ से रोटी बनाकर खिलाते थे। धीरे-धीरे सत्संग फैला। हजारों के बाद लाखों अनुयायी राधा स्वामी नाम से जुड़ने लगे। इसी बीच बड़े महाराज ने चौला त्याग दिया था। उनके समय में तीन से चार आश्रमों का निर्माण हो चुका था। जिसमें दिनोद, भिवानी व अंटा का आश्रम बना। 1997 में संत ताराचंद महाराज ने चोला त्याग दिया तो उनकी याद में गांव दिनोद में स्टॉर टैंपल के नाम से सितारा कुटिया का निर्माण हुआ। ये अनूठी संरचना भी षठकोणनुमा बनी है। इसके बाद उनके शिष्य संत हुजूर कंवर महाराज ने बड़े महाराज की रीति और परंपरा को जारी रखा। ---------------------------------------------------------------------- अब देश-विदेश में 65 से अधिक आश्रम संत कंवर महाराज के अनुसार राधा स्वामी नाम के देश-विदेश में लाखों अनुयायी जुड़े हैं। राधा स्वामी के 60 से 65 आश्रम बने हुए हैं। जिनमें मुख्य तौर पर यूपी, राजस्थान, उतराखंड, नेपाल, सिक्कम, गंगटोक के आश्रम शामिल हैं। इन आश्रमों में महाराज ताराचंद के उपदेश और गुरुवाणी की अमृत धारा हमेशा प्रवाह रहती हैं, जिसे सुनकर प्रत्येक साधक का रौम-रौम करूणा और भक्ति से भर उठता है। नशा और भ्रूण हत्या के खिलाफ चलाई व्यापक मुहिम रााधा स्वामी संप्रदाय के अनुयायी किसी तरह का नशा नहीं करते हैं। वे नशा से पूरी तरह से दूर रहकर प्रभू भक्ति में लीन रहते हैं। इसके अलावा अनुयायी चोरी, झूठ, कपट, निंदा, भ्रूण हत्या जैसी बुराईयों रहने का भी संकल्प लेते हैं। इसी तरह पर्यावरण संरक्षण, गाय व अन्य पशुओं के प्रति संवेदना रखने का संकल्प लेकर मानवता की भलाई का काम करते हैं। दिनोद का स्टार मंदिर (सितारा कुटिया) अनूठी संरचना के लिए प्रसिद्ध गांव दिनोद में स्थित सितारा कुटिया (स्टार मॉन्यूमेंट) राधास्वामी सत्संग भवन परिसर का अनूठी संरचना है जो मुख्य आकर्षण का केंद्र है। ये पांचवें गुरु परम संत हुजूर ताराचंद महाराज (बड़े महाराज) की समाधि स्थल है। यह अद्भुत मंदिर तारा के आकार में बना है, जिसकी ऊंचाई 88 फीट है और यह बिना किसी खंभे या पिलर के खड़ा है। स्टार टैंपल 60 फीट आधार के साथ एक षट्कोणीय संरचना है। इसकी तीन भुजाएं सफेद संगमरमर और तीन भुजाएं इतालवी ग्लास से ढकी हैं। इस मंदिर के केंद्र में परम संत ताराचंद महाराज की समाधि है। पूरी इमारत 6 फीट ऊंचे चबूतरे पर बनी है और इसमें पिलर का इस्तेमाल नहीं किया गया है। मंदिर के चारों ओर सुंदर बगीचा और ध्यान के लिए एक छोटी कुटिया भी है। यह स्थान अपनी शांति और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। हर साल बड़ी संख्या में अनुयायी और पर्यटक भी यहां आते हैं।

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