राजधानी इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। चिलचिलाती धूप और झुलसते तापमान ने मानो शहर को थाम-सा दिया है। आमतौर पर रौनक से भरे रहने वाले इंडिया गेट जैसे पर्यटन स्थलों पर भीड़ में भारी गिरावट देखी जा रही है। जो स्थान हमेशा सैलानियों और टहलने वालों से भरे रहते थे, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। धूप इतनी तीव्र है कि लोग घरों से निकलने में कतरा रहे हैं। लेकिन इसके बीच कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिन्हें इस आग उगलती दोपहर में भी बाहर रहना मजबूरी है — गरीब, मेहनतकश और रोज कमाने-खाने वाले लोग। रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक और दिहाड़ी मजदूर जैसे लोग ही सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। कई राहगीर तेज धूप से बचने के लिए सड़क किनारे पेड़ों की छांव का सहारा लेते नजर आए। जहां भी थोड़ी सी छांव मिली, लोग वहीं ठहरकर कुछ पल आराम करते देखे गए। आइसक्रीम बेचने वाले 'भैया' भी धूप में ग्राहकों का इंतज़ार करते-करते अपनी गाड़ी पर ही सुस्ताते नजर आए। रिक्शा चालक अपनी रिक्शा की सीट पर बैठे सवारियों की राह तकते दिखे। शहर में गर्मी का कहर इतना है कि दृश्य किसी लोकडाउन जैसे लगते हैं — सड़कों पर सन्नाटा, चाय की दुकानों पर सन्नाटा, और खुले आसमान तले जीवन यापन की जद्दोजहद करते कुछ ही लोग।