एक तरफ जिला प्रशासन जलभराव हुई जमीन से पानी निकासी के लिए खूब भागदौड़ कर रहा है तथा सरकार भी इस संदर्भ में अनेक बाद निर्देश जारी कर चुकी है, लेकिन नूंह जिले में इस कार्य को करने वाले कई विभाग जमकर लापरवाही बरतते हुए सरकार के निर्देशों को पलीता लगा रहे है। वहीं इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। इंड़री खंड के हसनपुर गांव के दर्जनभर लोग अपनी फरियाद लेकर समाधान शिविर में पहुंचे और बताया कि उनके गांव की करीब 700 से 800 एकड़ जमीन में तीन से चार फीट पानी भरा हुआ है। जिसके कारण खरीफ की फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है और यदि पानी निकासी के उचित प्रबंध नहीं हुए तो वे रबी की फसल की बिजाई भी नहीं कर पाएंगे। किसान योगेश कुमार, संजय कुमार नंबरदार, दीपक, कुलदीप, श्रीराम, शिवराम, विनोद कुमार, देवेंद्र, नितिन आदि ने एसडीएम नूंह अंकिता पुवार के समक्ष गुहार लगाते हुए कहा कि उनके खेतों से पानी निकलवा दीजिए, ताकि वे गेहूं की फसल समय से बो सके और अपने परिवार का गुजार कर सके। किसानों ने बताया कि यदि बिजली विभाग तत्परता दिखाता तो उनकी यह फसल भी खराब नहीं होती तथा खेतों में पानी भी जमा नहीं होता। कनेक्शन नहीं कर पाया बिजली विभाग: ग्रामीणों ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश पर उनके गांव में दो संपवैल का कार्य 2 जुलाई को पूरा हो गया था। तत्कालीन उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने इन संपवैलों तक बिजली पहुंचवाने के लिए खंभे भी डलवा दिए, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों ने उन पर तार नहीं लगाई, जिसके कारण वे संपवैल काम नहीं कर पाए। सिंचाई विभाग ने ग्रामीणों को पानी खींचने के लिए दो मोटर उपलब्ध करवा दी, लेकिन बिजली न होने के कारण किसानों के खेतों में पानी बढ़ता रहा। जब बिजली निगम काम नहीं कर पाया तो ग्रामीणों ने अपने प्रयासों से बांस-बल्ली गाड़कर एक मोटर तक बिजली पहुंचाई, लेकिन लंबी लाइन होने के कारण ग्रामीणों का प्रयास सफल नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने गुहार लगाई कि उनके गांव में बने दोनों संपवैल शुरु हो जाए तो पानी की निकासी हो जाएगी और वे अगली फसल बो सकेंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो उनके सामने परिवार के गुजारे को बड़ा संकट पैदा हो जाएगा। एसडीएम नूंह अंकिता पुवार ने बताया कि पानी निकासी के लिए किसानों का बिजली कनेक्शन का मामला था, कनेक्शन करवाने के लिए सिंचाई और बिजली विभाग के आपसी तालमेल से जल्द प्रक्रिया पूरी करवाई जाएगी ताकि किसानों को लाभ मिल सके और उनकी जमीन पर भरा पानी निकल सके।