12 जानलेवा बीमारियों से बचने के लिए सबसे अहम इनके टीके हैं। यह टीके बच्चों के जन्म से 10 वर्ष तक लगवाए जाते हैं। 10 नवंबर को विश्व इम्यूनाइजेशन दिवस पर यह बात विचारणीय है कि टीकाकरण के प्रति जागरूकता के बाद भी कुछ लोग टीका लगाए जाने के बाद उभरने वाले लक्षणों को लेकर आशंकित रहते हैं। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के टीकाकरण केंद्र में 10 साल पहले जहां 2 से 4 टीके लगवाने आते थे वहीं आज यह संख्या 50 तक पहुंची है लेकिन टीकाकरण के काम में लगे स्टाफ का कहना है कि अभी भी जागरूकता की जरूरत है। जिम्स के टीकाकरण केंद्र की ललिता नागर कहती हैं कि टीका लगाए जाने के बाद बच्चों को बुखार आना, सूजन होना, बच्चे का दूध न पीना, लगातार रोना आदि समान्य बात है। कुछ माता पिता यह सोचते हैं कि हमारे बच्चे को कैसा टीका लगा है। कहते हैं बच्चे को बीमारी से ठीक करने के लिए टीका लगवाया था लेकिन बच्चे की तो हालत खराब हो गई है। उन्हें बताया जाता है कि अगर अलग से कोई चीज दे रहे हैं तो कुछ प्रभाव पड़ता है। दीर्धकाल में इसका कोई गलत प्रभाव नहीं रहता है। अब धीरे-धीरे सभी समझ रहे हैं पहले 50 फीसदी टीकाकरण से दूरी बनाते थे अब इनकी संख्या घटकर बहुत ही नगण्य रह गई है।