ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में बीमारी या दुर्घटना के बाद बच्चों और अन्य मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए डॉक्टर के आने तक उसकी सांसों को स्थिर बनाए रखने का प्रशिक्षण दिया गया। ग्वालियार से आए डॉ. प्रवीण गर्ग की टीम ने जिम्स के मेडिकल छात्रों, स्टाफ और चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया। पहले दिन बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों को एडवांस लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग दी गई। इसमें बताया गया कि एक प्रोटोकोल के जरिए मरीज के मामले में हस्तक्षेप किस तरह करना है। बच्चों के मामलों मे कैसे जल्दी पता कर सकते हैं कि जानलेवा बीमारियां हैं। इस ट्रेनिंग में सांस लेने की तकलीफें, हार्ट से संबंधी तकलीफों की पहचान करना और उसमें तात्कालिक राहत देना शामिल है। अगर किसी में सांस ही नहीं तो किस प्रकार उसको पुनर्जीवित करना है, यह भी शामिल है। यहां ट्रेनिंग एक मॉड्यूल के जरिए दी जा रही है। बच्चों के दिल की धड़कन बंद होने पर उसे फिर से शुरू करने के लिए भी एक मॉड्यूल है। छह लोगों पर एक प्रशिक्षक है। यह प्रशिक्षक देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए हैं।