नोएडा के मामूरा में बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड ने दो लोगों की जान लेने के साथ दर्जनों परिवारों की जिंदगी भी पूरी तरह बदल दी। आग से करीब 50 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अब उनके सामने सिर छिपाने की जगह, जरूरी दस्तावेज और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। गुरुवार को हादसे के बाद पीड़ित परिवारों ने अपना दर्द बयां किया। आग बुझने के बाद प्रशासन ने पूरी इमारत खाली करा दी। इसके चलते लोगों लो अपना बचा हुआ सामान लेकर रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां शरण लेने को मजबूर हो गए। कई लोगों ने बताया कि रातभर नया कमरा तलाशते रहे, लेकिन कहीं कमरा नहीं मिला और जहां मिला वहां एडवांस किराया मांगा गया। आर्थिक नुकसान झेल चुके परिवारों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। बृहस्पतिवार सुबह लोग फिर घटनास्थल पर पहुंचे। कोई जले हुए मलबे में आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य जरूरी दस्तावेज ढूंढ़ता नजर आया, तो कोई बचा हुआ सामान समेट रहा था। कई लोगों की बाइक, घरेलू सामान, कपड़े और वर्षों की जमा-पूंजी आग में जलकर राख हो गई। पीड़ितों का कहना है कि जान तो बच गई, लेकिन अब जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाना आसान नहीं होगा। उनके पास नया कमरा लेने और जरूरी सामान खरीदने तक के पैसे नहीं बचे हैं। सड़क किनारे बिखरा सामान और अपनों के साथ रोते-बिलखते लोग इस हादसे की भयावहता और उनके दर्द को साफ बयां कर रहे थे।