दूरियां कभी रिश्तों की मजबूती को कम नहीं कर पातीं। इस बात को सच साबित किया है कनाडा और यूएसए में रह रहीं दो सगी बहनों ने। अपने 80 वर्षीय पिता के गंभीर हृदय रोग के इलाज के लिए उन्होंने जो तत्परता, समझदारी और जिम्मेदारी दिखाई, उसने समाज की अन्य महिलाओं के सामने एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है। एओर्टिक कैल्सिफिकेशन जैसी जटिल बीमारी से जूझ रहे उनके पिता ग्रेटर नोएडा में रह रहे थे। इस बीमारी में हृदय के एओर्टिक वाल्व पर कैल्शियम जमा हो जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है और मरीज को सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पिता की बिगड़ती हालत की जानकारी मिलते ही दोनों बेटियों ने विदेश से भारत में आकर तुरंत इलाज की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने डॉक्टरों से जरूरी मेडिकल सलाह ली और बिना समय गंवाए ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज शुरू कराया। ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजी, कंसल्टेंट डॉ. शांतनु सिंघल ने बताया कि मरीजों का इलाज करने के लिए डॉक्टरों की टीम ने हाई-रिस्क टीएवीआर (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट) प्रक्रिया का विकल्प चुना। यह एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें बिना बड़े चीरे के कैथेटर के माध्यम से खराब वाल्व को बदल दिया जाता है। टीम ने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इलाज के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ है और अब वे धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।