ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर घोषित स्मार्ट गांव तिलपता में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां पर गांव के लोगों ने अपनी परेशानियों को बताया। गांव में प्रमुख रूप से जननिकासी, जाम, सड़क, नाली, सफाई और पानी की समस्याएं बनी हुई हैं। गांव के लोगों ने कहा कि स्मार्ट गांव कागजों पर अच्छा लगता है जमीनी हकीकत तो कुछ और ही है। उन्होंने बताया कि गांव से कालदा रजबहा के नाम से पहले नहर निकली हुई थी। जोकि अब लाने में तब्दील हो चुकी है। वहीं लोगों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी कभी प्राधिकरण के अधिकारियों ने गांव का भ्रमण नहीं किया है। प्राधिकरण के जिम्मेदारों के कार्य करने के तरीके पर गांव वालों ने सवाल उठाए। अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में गांव के लोगों ने बताया कि गांव से कालदा रजबहा नाम से नहर निकली हुई थी। इसके पानी से तिलपता, मकौड़ा, जलपत, पाली, घोड़ी स्वराजपुर, मांयचा, सलेमपुर गुर्जर, बाघपुर, कनारसी, घंघौला आदि गांवों में खेतों की सिंचाई की जाती थी। लेकिन गंदगी होने के कारण अब वह नाले में तब्दील हो चुकी है। 2010 में गांव में पानी और सीवर पाइप लाइन डाली गई थी लेकिन 14 वर्ष बीतने के बाद भी दोनों लाइनें संचालित नहीं हो पाई हैं। लोगों ने बताया कि तिलपता चौक से दादरी बाइपास तक फ्लाईओवर की मांग बीते कई वर्षों से कर रहे हैं। इसके लिए तीन बार सर्वे भी हो चुका है। लेकिन अभी तक काम नहीं शुरू हुआ है। जिस कारण यहां रोजाना दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार मरीजों के जाम में फंसने कारण उनकी मौत हो जाती हैं। लगभग 20 हजार की आबादी वाले गांव में सिर्फ 08 सफाई कर्मी होने के कारण गांव में गंदगी फैली रहती है। कई बार प्राधिकरण से सफाई कर्मियों के बढ़ाए जाने की मांग की जा चुकी है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। लगभग 15 वर्ष पहले गांव में स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। जोकि अब लगभग खराब हो चुकी हैं। जिससे पूरे गांव में शाम के समय में अंधेरा छा जाता है। कई बार लोग हादसे का शिकार भी हो जाते हैं। गांव में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। जबसे पंचायतीराज खत्म हुआ है तभी से गांव में लगे हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। बीते 10 वर्षों से कोई सही कराने वाला नहीं है।